इस चिट्ठे पर प्रकाशित सभी विचारों के लिये लेखक स्वयं उत्तरदायी है। संपादन मंडल का लेखक की राय से सहमत होना अनिवार्य नहीं है। -संपादक

सीबीआई से कब तक भागेंगे मुलायम जी !!


संप्रग सरकार के लिए बैसाखी के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुके मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) आजकल किसी एक वजह से बहुत ज्यादा परेशान हैं. वजह है सीबीआई का खौफ. वैसे केंद्र सरकार के होते हुए ऐसी कोई लपट नहीं है जो मुलायम के करीब पहुंच सके. लेकिन जिस तरह सुप्रीम कोर्ट उनके परिवार के उपर सीबीआई जांच के मामले को तवज्जो दे रही है उससे तो यही लगता है कि मुलायम अब ज्यादा दिन तक जांच से दूर नहीं भाग सकते.

सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) और उनके बेटों अखिलेश यादव तथा प्रतीक के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश को बरकरार रखा है. हालांकि कोर्ट ने अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव की पुनर्विचार याचिका मंजूर करते हुए उन्हें राहत प्रदान कर दी है. प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर और न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की पीठ ने मुलायम, उनके पुत्र Read More (Click Here)

कहां गया ‘मद्रास टाइगर’ का वह पैनापन




भारत में शतरंज एक पारंपरिक खेल है. दो खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला यह बौद्धिक एवं मनोरंजक खेल आपके दिमाग की क्षमता को दर्शाता है. शतरंत की बिसात पर चली जाने वाली एक भी चाल आपको पलभर में विजेता भी बना सकती है या फिर खेल से बाहर भी कर सकती है. वर्तमान में भारत के इस पारंपरिक खेल को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अगर किसी खिलाड़ी को श्रेय जाता है तो वह हैं मद्रास टाइगरऔर विशीके उपनामों से प्रसिद्ध विश्वनाथन आनंद.

विश्वनाथ आनंद की शिक्षा
अपनी मां से शतरंज की बारीकियों को सीखने वाले विश्वनाथन आनंद का जन्म 11 दिसंबर, 1969 को तमिलनाडु के मायिलादुथुरै में हुआ. छह साल की उम्र से ही विश्वनाथन आनंद अपनी मां के साथ शतरंज की बिसात पर चालें चला करते थे. उनके पिता विश्वनाथन अय्यर दक्षिण भारतीय रेलवे के जनरल मैनेजर रह चुके हैं. आनंद ने चेन्नई

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यह दाग शायद ही कभी मिटे

जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में कई बड़े नेता आए हैं उससे एक पक्ष तो बहुत ही खुश है जो यह चाहता है कि आने वाले आम चुनाव में मोदी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार हों लेकिन वहीं दूसरा पक्ष जो यह समझता है कि मोदी 2002 के दंगों के सबसे बड़े दोषी हैं, वह नहीं चाहता कि मोदी अपने राज्य से बाहर निकल पूरे देश का नेतृत्व करें. अमरीका में एक ऐसा ही वर्ग है जो मोदी के खिलाफ मोर्चेबंदी कर रहा है. 

गौरतलब है कि अमेरिका के 27 सांसदों ने अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को पत्र लिखकर नरेंद्र मोदी को वीजा न देने की सिफारिश की है. इन सांसदों ने कहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2002 के दंगों के पीड़ितों को इंसाफ. Click Here



…..ये लगा नरेंद्र मोदी पर निशाना

गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर एक ऐसे नेता पर निशाना मारा जो राष्ट्रीय स्तर पर खबरों में रहते हैं. केजरीवाल ने इस बार भारतीय जनता पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता गुजरात के मुख्यमंत्री को निशाना बनाया है. केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस के साथ मिलकर गुजरात को लूटने के आरोप लगाए हैं. केजरीवाल का यह आरोप अपनी पार्टी नामकरण के बाद पहला आरोप है.

उन्होंने कहा कि मोदी का बिजली उत्पादक कंपनी अदानी ग्रुप से साथ गहरी सांठगांठ है. नरेन्द्र मोदी कई मौकों पर अदानी ग्रुप को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया. पिछले दिनों कोयले की कालिख से जिस तरह से देश के कई बड़े नेताओं का मुख काला हुआ उसमें नरेंद्र मोदी भी नहीं बच पाए. अरविंद ने आरोप लगाया कि ‘गुजरात सरकार ने कोयला खदानें तो फ्री में मुहैया करा दीं, लेकिन बदले में 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से अदानी ग्रुप से बिजली खरीदी. इस तरह से सरकार को बड़ा घाटा हुआ. अदानी ग्रुप गुजरात सरकार.....


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भारतीय क्रिकेट का सचिनीकरण



क्रिकेट में ऐसा बहुत कम ही होता है जब किसी खिलाड़ी के लगातार ढुलमुल प्रदर्शन के बावजूद उसे टीम में बने रहने के लिए बार-बार मौके दिए जाएं. यहां हम बात कर रहे हैं मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की. खराब प्रदर्शन से जूझ रहें सचिन को कोलकाता में इंग्लैंड के खिलाफ खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच के लिए एक बार फिर टीम इंडिया में शामिल कर लिया गया है. ऐसा माना जा रहा था कि सचिन बचे हुए टेस्ट मैच में शायद नहीं खेलेंगे लेकिन बीसीसीआई और चयनकर्ताओं ने एक बार फिर उन भरोसा जताया.

अब सवाल यह कि क्रिकेट को गली-मौहल्ले तक पहुंचाने वाले सचिन के भारतीय क्रिकेट टीम  में बने रहने को लेकर अभी तक संशय क्यों बना हुआ हैइसका जवाब यह है कि लगभग 30 हजार से अधिक रन बनाने वाले और इसी साल सौ शतक की उंचाई छुने वाले सचिन आज एक-एक रन के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं. जो गेंदबाज उन्हें आउट करने के सपने देखता था आज वही गेंदबाज सीना तानकर सचिन को बोल्ड कर रहा है. अपने कॅरियर में बड़े-बड़े गेंदबाजों के छ्क्के छुड़ाने वाले सचिन आज इन्ही गेंदबाजों Read More (Click here)

क्या कसाब को एक मच्छर ने मारा


एक आतंकवादी को लेकर सरकार ने जिस तरह से चार साल तक भारतीय जनता को गुमराह करके रखा उस आतंकवादी का अंत भी एक रहस्य के साथ दफन हो गया. रहस्य इस बात का कि क्या सचमुच में कसाब को फांसी दिया गया या फिर वजह कोई और है.

ऐसा माना जा रहा है कि जिस तरह से सरकार ने कसाब की मौत को गोपनीय बनाकर रखा, मीडिया को कानों-कान खबर नहीं लगने दी.  Read More (Click Here)

‘बलात्कार’ को अपनी पहचान बना रहे हैं समाजवादी !!


प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे मुलायम सिंह यादव की पार्टी के एक विधायक ने ऐसा काम किया है जिससे मानवता भी शर्मशार हो जाए. मामला उस दिन का है जब पूरा देश दीपावली पर्व की खुशियां मना रहा था. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में समाजवादी पार्टी के विधायक के मकान में उनके नौकर तथा कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा अगवा कर लायी गई एक लड़की से कथित रूप से सामूहिक बलात्कार का सनसनीखेज मामला सामने आया है.


पुलिस सूत्रों के अनुसार बलरामपुर सदर से सपा विधायक जगराम पासवान के घर के पास ही कक्षा पांच में पढ़ने वाली बालिका का घर है. मंगलवार रात दस बजे जब शौच के लिए वह खेत में गई, तभी नौकर राकेश ने उसे पकड़ लिया और विधायक के आवास पर लाकर 21 घंटे तक कमरे में बंद करके उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया. इस जानकारी पर लोगों ने विधायक का घर घेरकर नारेबाजी शुरू कर दी. स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने पुलिस ने पीड़िता को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा और मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया.

इस तरह की घटना उत्तर प्रदेश के लिए कोई बात नहीं है. पहले बहुजन समाजवादी पार्टी के शासन काल में उनके विधायक और नेता कमजोर तबके की महिलाओं को अपने हवस का शिकार बनाते रहे हैं और अब वही काम अखिलेश यादव की नेतृत्व Read More (Click Here)

मुनाफे के लिए बच्चों को जहर परोसते थे यह भ्रष्टाचारी


देश में घोटाले को लेकर हर दिन एक नए खुलासे के बाद जनता के सामने एक और नया घोटाला आया है. इस बार का घोटाला गरीब और भुखमरी के शिकार बच्चों से जुड़ा हुआ है. यह वह बच्चे हैं जो सारी जिंदगी कुपोषण से लड़ते हैं. दरअसल महाराष्ट्र में आईसीडीएस (समन्वित बाल विकास योजना) कार्यक्रम के तहत गरीब बच्चों को दिए जाने वाले अनाज में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है. यह घोटाला करीब एक हजार करोड़ रुपये का है. इससे पहले महाराष्ट्र ने आदर्श, सिंचाई, टोल टैक्स घोटालों जैसे बड़े घोटाले भी देखे.


यह घोटाला उस समय सामने आया जब खाद्य सुरक्षा पर चल रही सरकारी योजनाओं की निगरानी के लिए नियुक्त सुप्रीम कोर्ट के कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट दी. रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना को चलाने के लिए कई निजी कंपनियों ने फर्जी Read More (Click Here)

अब तक दिग्विजय सिंह के तरकश से कितने निकले तीर

समाज के अलग-अलग लोगों को अपने ही तरीके से टारगेट करके मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाले कांग्रेस महाचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस बार बीजेपी के एक बड़े नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना निशाना बनाया है. दिग्विजय सिंह ने अपने एक बयान में कहा कि दूसरे की पत्नियों पर अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले नरेंद्र मोदी अपनी पत्नी के बारे में क्यों चुप हैं? उन्होंने दावा किया कि मोदी शादीशुदा हैं और उनकी पत्नी का नाम यशोदा बेन है.


गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड बताया था. जवाब में कांग्रेस का बचाव करते हुए और महिलाओं के अपमान का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह... To Read More (Click Here)

टेस्ट क्रिकेट के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ कितना सही

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने एक अहम फैसले में वनडे और टी-20 के बाद अब टेस्ट क्रिकेट मैच को भी दूधिया रोशनी में खेले जाने का निर्णय लिया है. क्रिकेट परिषद का मानना है कि इस तरह के संशोधन से टेस्ट क्रिकेट को और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है. अपने इस निर्णय से उन्होंने टेस्ट क्रिकेट का पूरी तरह से बाजारीकरण करने का फैसला किया. उन्होंने टेस्ट के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करके उसे वनडे और टी-20 की तरह रंगीन बनाने की कोशिश की है. हालांकि डे-नाइट मैचों में बॉल किस रंग की होगी, इसका फैसला सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्डों पर छोड़ा गया है. इसके अलावा यह भी उन पर निर्भर करेगा कि वे डे-नाइट टेस्ट मैच खेलना चाहते हैं या नहीं.



बाजार इस कदर क्रिकेट पर हावी हो रहा है कि किक्रेट संघों के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को पैसों के अलावा कुछ और नहीं दिखता. इस तरह के बदलाव से अब दर्शकों को वह पांच दिन का संघर्ष देखने को नहीं मिलेगा जिसमें कप्तान से लेकर खिलाड़ी मैच जीतने के लिए कई तरह के गणित लगाते थे. टेस्ट मैच शुरू होने से पहले खिलाड़ी Read More Click Here
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