इस चिट्ठे पर प्रकाशित सभी विचारों के लिये लेखक स्वयं उत्तरदायी है। संपादन मंडल का लेखक की राय से सहमत होना अनिवार्य नहीं है। -संपादक

कुदरत के तांडव के लिए कौन है जिम्मेदार

कहते हैं मानव अपने बुरे कर्मों का फल यहीं पर भोगकर जाता है. उसे तो दूसरे जन्म तक इंतजार भी नहीं करना पड़ता. आज जो कुदरत के कहर की वजह से पूरी दुनिया में तबाही हो रही है यह मानव के बुरे कर्मों का ही नतीजा है. देव भूमि उत्तराखंड में भी कुदरत की लगातार मार पड़ रही है. अब तक की खबर के मुताबिक बारिश और बादल फटने की वजह से समूचे उत्तर भारत में 130 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग या तो लापता हैं या फिर अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं.


जलमग्न हुआ केदारनाथ मंदिर

उत्तराखंड में आई भारी बारिश और बादल फटने के बाद आई बाढ़ से भयंकर तबाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 12 हजार फुट की ऊंचाई पर बने केदारनाथ मंदिर के आसपास सब कुछ बह गया है. अचानक आई इस तबाही से लगभग 50 लोगों की मौत हो गई. पलक झपकते ही मुख्य मंदिर के आसपास का इलाका मलवे.......Read (Click Here

पीठ पर बच्चे को बांधकर निकली जब एक वीरांगना


इतिहास के पन्नों पर यदि नजर डालें तो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता. उस समय के साक्ष्य से पता चलता है कि महिलाओं ने जब-जब अपने राज्य के लिए शस्त्र उठाए हैं तब-तब आंदोलन ने बड़ा रूप लिया है. महिलाओं की भूमिका की चर्चा किए बगैर 1857 के इतिहास को भी पूरा नहीं माना जाता.
उस दौरान आजादी के महासंग्राम का स्वर्णिम अध्याय बनी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शहादत को यह देश कभी नहीं भूल सकता. आज महारानी लक्ष्मीबाई शहीदी दिवस है. आज ही के दिन वर्ष 1857 में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हो गई थीं.



अश्वारोहण और शस्त्र-संधान में निपुण महारानी लक्ष्मीबाई ने झांसी किले के अंदर ही महिला-सेना खड़ी कर ली थी, जिसका संचालन वह स्वयं मर्दानी पोशाक पहनकर करती थीं. उनके पति राजा गंगाधर राव यह सब देखकर प्रसन्न रहते. कुछ समय बाद लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया, पर कुछ ही महीने बाद बालक की मृत्यु हो गई. पुत्र वियोग के आघात से दु:खी राजा ने 21 नवंबर, 1853 को प्राण त्याग.... Read more (Click Here)

पीठ पर बच्चे को बांधकर निकली जब एक वीरांगना

इतिहास के पन्नों पर यदि नजर डालें तो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता. उस समय के साक्ष्य से पता चलता है कि महिलाओं ने जब-जब अपने राज्य के लिए शस्त्र उठाए हैं तब-तब आंदोलन ने बड़ा रूप लिया है. महिलाओं की भूमिका की चर्चा किए बगैर 1857 के इतिहास को भी पूरा नहीं माना जाता.
उस दौरान आजादी के महासंग्राम का स्वर्णिम अध्याय बनी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शहादत को यह देश कभी नहीं भूल सकता. आज महारानी लक्ष्मीबाई शहीदी दिवस है. आज ही के दिन वर्ष 1857 में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हो गई थीं.

महारानी लक्ष्मीबाई


अश्वारोहण और शस्त्र-संधान में निपुण महारानी लक्ष्मीबाई ने झांसी किले के अंदर ही महिला-सेना खड़ी कर ली थी, जिसका संचालन वह स्वयं मर्दानी पोशाक पहनकर करती थीं. उनके पति राजा गंगाधर राव यह सब देखकर प्रसन्न रहते. कुछ समय बाद लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया, पर कुछ ही महीने बाद बालक की मृत्यु हो.... Read More (Click Here)

बेटा तुम्हारी उम्र अभी पढ़ने-लिखने की है

क्या आपने कभी सोचा है कि जो आप खाना खा रहे हैं या फिर जो आप कपड़ा पहने रहे हैं उसमें कहीं न कहीं उस मासूम बच्चे की मेहनत है जो समाज व व्यवस्था की उदासीनता की वजह से छोटी सी उम्र में मजदूरी करने पर विवश है. उनकी विवशता तब तक जारी रहती है जब तक वह नशा और चोरी-चकारी सीख एक खूंखार अपराधी नहीं बन जाते.

विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस  (World Day Against Child Labour)

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय श्रम संस्था द्वारा 12 जून को विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस (World Day Against Child Labour) के रूप में मनाया जाता है. इसका लक्ष्य लोगों से एकजुट होकर विश्वव्यापी बाल-श्रम की.... Read This Blog (Click Here)

हमने आंधियों में भी चिराग अकसर जलाए हैं

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है”. भारत एक वीरों का देश है यह बात आप अकसर सुनते रहते हैं लेकिन जब हम स्वतंत्रता संग्राम के उन सभी क्रांतिकारियों को याद करते हैं तो हमारी स्मृति में एक नाम सबसे पहले आता है वह है पंडित रामप्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) का. स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर देने वाले वीरों में रामप्रसाद बिस्मिल का एक विशिष्ट स्थान है.

 रामप्रसाद बिस्मिल का जीवन (Ram Prasad Bismil Life)

रामप्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) का जन्म 11 जून, सन 1897 में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में हुआ. मैनपुरी बिस्मिल का ननिहाल था. बिस्मिल के दादा और पिता ग्वालियर के निवासी थे....... Read This Article (Click Here)

शिल्पा शेट्टी का पति भी काली कमाई का हिस्सेदार !!

भारत में क्रिकेट जैसे धर्म को धंधा बनाने वाली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में हुए स्पॉट फिक्सिंग को लेकर नित नए-नए खुलासे किए जा रहे हैं. फिक्सिंग में श्रीसंत, विंदू दारा सिंह और गुरूनाथ मयप्पन जैसे बड़े नाम सामने आने के बाद आज एक और बड़ा नाम सामने आया है. माना यह जा रहा है कि बॉलिवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा ने स्वीकारा है कि वह उन्होंने आईपीएल में सट्टेबाजी की थी.

आपको बता दें कि राजस्थान रॉयल्स वही टीम है जिनके तीन खिलाड़ियों श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चह्वाण की गिरफ्तारी के बाद आईपीएल 6 में स्पॉट फिक्सिंग के बारे में पता चला. राज कुंद्रा से घंटों पूछताछ करने के बाद दिल्ली के पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने दावा किया है कि राजस्थान रॉयल्स के मालिक स्पॉट Read. this article (Click Here)

जेल से बाहर आए ‘स्पॉट फिक्सर’

अभी कुछ ही दिनों की बात थी जब मुंबई की एक अदालत ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार किए गए अभिनेता विंदू दारा सिंह और एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन को 14 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. तब यह लगा था कि इन दोनों पर धीरे-धीरे अदालत और पुलिस द्वारा शिकंजा कसा जा रहा है लेकिन आज अदालत ने जिस तरह से इन दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत दी है उससे इन्हें अपने खिलाफ सबूत मिटाने का मौका मिल गया है.

अदालत ने स्पॉट फिक्सिंग के आरोपी गुरुनाथ मयप्पन और विंदू दारा सिंह के लिए 25-25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मंजूर करते हुए अदालत ने इन्हें देश छोड़ने पर रोक लगा दी है और उनके पासपोर्ट जमा करा लिए गए हैं. अदालत ने फिक्सिंग से जुड़े आठ आरोपियों को भी सशर्त जमानत दे दी है. जमानत पाने वालों में प्रेम तरनेजा, अल्पेश पटेल, नीरज शाह, अशोक व्यास, रमेश व्यास तथा पांडुरंग कदम शामिल हैं. मुंबई कोर्ट ने इन सभी को हफ्ते में हर दूसरे दिन क्राइम ब्रांच के समक्ष हाजिरी भी देने को कहा.


मुंबई पुलिस की विफलता
गुरुनाथ मयप्पन और विंदू दारा सिंह के खिलाफ तमाम तरह के खुलासे और सबूतों का दावा करने वाली मुंबई पुलिस कोर्ट में सट्टेबाजी के अलावा स्पॉट फिक्सिंग के मामले को भी साबित नहीं कर पाई. जमानत देते समय कोर्ट ने मुंबई पुलिस की इस दलील को नहीं माना कि ये सभी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं.

क्या है मामला ?

गौरतलब है कि आईपीएल 6 में स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप में आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजीत चंडीला को 16 मई को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद सट्टेबाजों के साथ संबंधों के आरोप में 22 मई को अभिनेता व..... Read (Click Here)

क्रिकेट प्रेमियों को बेवकूफ बनाने का सिलसिला जारी है

आईपीएल मैचों में स्पॉट फिक्सिंग को देखते हुए हाल में केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने कहा था कि भारत में क्रिकेट की राष्ट्रीय संचालन संस्था बीसीसीआई को सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के अंतर्गत आना चाहिए. उनका कहना वाजिब था क्योंकि जिस तरह से अब बीसीसीआई और उससे जुड़े लोग मनमानी कर रहे हैं उससे तो एक बात साफ है कि वह जाहिर होने देना नहीं चाहते कि उनकी संस्था भ्रष्ट लोगों की संस्था है और जहां पर अनियमितता और अनैतिक काम करके क्रिकेट के चाहने वालों को बेवकूफ बनाया जाता है......Read More (ClickHere)

सचिन का यह ‘दर्द’ किस काम का

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद भारतीय क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था भारतीय किक्रेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि दुनिया की सबसे धनवान क्रिकेट संस्था होने के बावजूद भारतीय क्रिकेट में हो रहे भ्रष्टाचार पर बीसीसीआई रोक क्यों नहीं लगा पा रही है? क्या वह स्वयं एक भ्रष्ट खेल संस्था हो गई है?

यह तो सवाल हुआ बीसीसीआई पर लेकिन सवाल उन खिलाड़ियों पर भी उठते हैं जो कहने को तो बड़े खिलाड़ी हैं लेकिन जब उनसे क्रिकेट में फैल रहे भ्रष्टाचार के बारे में पूछा जाता है तब वह या तो चुप्पी साध लेते हैं या फिर इसको निराशाजनक बताकर अपनी जिम्मेदारी से कन्नी काट लेते हैं. भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तरह ही दुनिया के महानत बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर(Sachin Tendulkar) ने भी स्पॉट फिक्सिंग Read this article (Click Here)

जिसने भगवान के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया !!

एक दौर था जब भारतीय फिल्मों में कॉमेडी नाममात्र के लिए हुआ करती थी. उस समय निर्देशकों के सामने यह चुनौती थी कि वह कैसे अपनी फिल्म की तीन घंटे की अवधि को पूरा करें. इसके लिए वह बीच-बीच में कॉमेडी के सीन को डाल देते थे. उस दौर में ऐसे कम ही निर्देशक थे जो कॉमेडी आधारित फिल्म बनाने की जहमत उठा सकते थे. लेकिन जब से फिल्म.......... Read This blog Click Here

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