इस चिट्ठे पर प्रकाशित सभी विचारों के लिये लेखक स्वयं उत्तरदायी है। संपादन मंडल का लेखक की राय से सहमत होना अनिवार्य नहीं है। -संपादक
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वरुण का नामांकन पत्र

पीलीभीत से कथित सांप्रदायिक भाषण देने वाले वरुण गाँधी १५ दिनों के लिए जेल से तो छूट गए
लेकिन अब वो भाजपा में नामांकन के लिए पत्र भरेगे।

क्या देश की सरकार के लिए ऐसे उम्मीदवारों का खड़ा होना कहा तक सही है,
जो चुनाव से पहेले ही सांप्रदायिक भाषण दे रहे है वो जीतने के बाद क्या रंग दिखाएगे।

तकरार और आरोप

वरुण मसले में मेनका गाँधी और मायावती की इन दिनों तकरार देखने को मिल रही है
दोनों एक दुसरे के ऊपर आरोपो की बौछार लगा रहे है।
देखने में तो यह सब आम सा लग रहा है, लेकिन असल में तो यह राजनीति के मैदान में जीतने की एक बहस है।

वरुण गांधी बनाम जानवर

मेरे साथ जेल में जानवरों जैसा बर्ताव हुआ- वरुण गांधी

चलो ठीक ही हुआ, अब मेनका जी आपके संरक्षण के लिए अभियान चला सकती हैं!
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