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वरुण गांधी प्रकरण

वरुण गांधी प्रकरण को सुनने के बाद
मुझे मेनका गांधी की ग़लती बहुत साल रही थी
क्योंकि जब वरुण को बोलने की तमीज़ सिखानी थी
तब मेनका जी कुत्ते-बिल्ली पाल रही थी
अब उनके पाले हुए जंतु तो राजनीति कि गलियों में
मस्ती से डोल रहे हैं
औए बेचारे वरुण
संस्कारों के अभाव में
पशुता की भाषा
बोल रहे हैं

धर्म के नाम पर राजनीति का खेल

आज के अखबार मे जब मैंने कल्याण सिंह के बारे मे उनकी नैतिक जिम्मेदारियों को पड़ा तो ऐसा आभास हुआ मानो धर्म के नाम पर राजनीति का व्यापार चल रहा है। कल्याण सिंह जो पहले बीजेपी कार्यकर्ता हुआ करते थे उनके अनुसार उन्होंने अपने कार्यकाल मे मुस्लिम समुदाय का आशवासन जीता था। उन्हें जब यूपी मुख्यमंत्री के पद से बर्खास्त किया गया तब उन्होंने बीजेपी छोड़ मुलायम जी से हाथ मिला लिया, जहा उनके अनुसार उन्हें हिन्दुओ का आशवासन प्राप्त हुआ। उनका कहना है की मुसलमानों की तरह उनका मकसद बीजेपी को दफ़न करना है। तो क्या यह आशवासन अपनी राजनीति को बचाए रखने के लिए प्राप्त किया था। यह तो धर्म के नाम पर खिलवाड़ है। किसी मजहब की लड़ाई राजनीति या सता के साथ नही होती। धर्म के लिए की गई सेवा निस्वार्थ भाव से की जाती है, स्वार्थ से नही।
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